Succes story of successful peoples and bil gates and alvert eainsteen


दोस्तो आपके लिए ये 3 success कहानिया जो आपके जीवन को बदल कर रख दें ।।

और भी आगे नीचे Story दी गई है उसे भी पढें ।।

(1):-बिल गेट्स ( Bill gates)

(2):-अल्बर्ट आइंस्टीन (Albert Einstein)

(3):-अब्राहम लिंकन ( Abraham Lincoln)

आइए दोस्तो अब हम इन सबके बारे मे एक एक करके पढते हैं।
ओर देखते है कि कौन कैसे success हुआ।।


1):-बिल गेट्स (Bill gates)


कुछ वर्ष पहले तक वर्ल्ड के सबसे रिच (Rich) इंसान बिल गेट्स को सभी जानते हैं, ये हार्वर्ड ड्रॉपआउट थे। उन्होंने अपने करियर (Cariar) की शुरुआत में ट्रैफ-ओ-डेटा नामक एक बिजनेस का को-ओनरशिप किया, जो पूरी तरह विफल रही थी। हालांकि, कंप्यूटर प्रोग्रामिंग में इनके स्किल (Skill) और जुनून ने इस विफलता को प्रसिद्ध सॉफ्टवेयर (Software) कंपनी माइक्रोसॉफ्ट में बदल दिया। बिल गेट्स उस समय के 31 वर्ष के थे और दुनिया के सबसे कम उम्र के अरबपति बनें। इस असफलता के बारे में बिल गेट्स ने एक स्पीच में कहा था कि "सफलता का जश्न मनाना ठीक है लेकिन असफलता के सबक पर ध्यान देना अधिक महत्वपूर्ण है।"


2)-: अल्बर्ट आइंस्टीन



'आइंस्टीन' शब्द आज के समय में जीनियस का पर्याय है। क्‍या आपको पता है कि " रिलेटिविटी: द स्पेशल एंड द जनरल थ्योरी  "के जनक स्वयं अल्बर्ट आइंस्टीन थे, जो नौ वर्ष की आयु तक धाराप्रवाह नहीं बोल सकते थे। उनके विद्रोही स्वभाव के कारण उन्हें स्कूल से निकाल दिया गया था । और उन्हें ज्यूरिख पॉलिटेक्निक स्कूल में प्रवेश देने से भी मना कर दिया गया । हालांकि यह सभी असफलताएं उन्हें 1921 में भौतिकी में नोबेल पुरस्कार जीतने से नहीं रोक सकीं। और आइंस्टीन का मानना था कि, "सफलता के प्रगति में विफलता रहती है।"


3):-अब्राहम लिंकन



दोस्तो अमेरिका के सबसे फेमस राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन असफलता के एक बड़े उदाहरण हैं। वे 1831 में व्यापार में असफल होने के बाद भी ,फिर से उन्होंने 1836 में एक नर्वस ब्रेकडाउन से भी पीड़ित हुए और 1856 में राष्ट्रपति पद की रेस से बाहर होने के बाद भी अब्राहम लिंकन अपने रास्ते पर अडिग रहे। और लिंकन ने कहा था कि, "मेरी बड़ी चिंता यह नहीं है कि आप असफल हुए हैं या नहीं, बल्कि यह है कि क्या आप अपनी असफलता से संतुष्ट हैं।" लिंकन को
1861



Success Stories –दोस्तो स्वागत है आपका ! मन मे सफलता की आग लगा देने वाली Motivational and Success stories की दुनिया मे ||

दोस्तो आज हम आपके लिए एक ऐसी Hindi की success story लें कर आए है । जिसे पढ़ने के बाद आप भी जान जाएंगे की कैसे अपने जिद्द और जुनून के चलते कमजोर दिमाग वाला इंसान भी इतिहास रच सकता है |



तो चलिये फिर हम शुरू करते है___



success story in hindi 


Successful men


Success Story – यह कहानी हैं स्वीडन के एक छोटे से एक गांव मे एक गरीब किसान परिवार मे जन्मे एक बच्चे की है, जिसका नाम इंग्वार रखा गया । इंग्वार का जन्म 23 मार्च 1926 को हुआ था ।.




यह  स्वीडन के इतिहास का एक ऐसा समय था, जब स्वीडन बहुत गरीबी और बदहाली के दौर से गुजर रहा था | उस समय स्वीडन की अर्थव्यवस्था की हालत बहुत काफी खराब थी |


उनके पिता जी किसान थे, जिनकी अपनी ही जमीन थी, उसी जमीन पर वो खेती करते थे, और उसी में अनाज सब्जियाँ उगा कर अपना और अपने परिवार का पेट पालते थे ।



उनका घर भी खेत की ही जमीन पर ही था | बाकि घर के खर्चो को चलाने के लिए, इंग्वार के पिता जी  प्रायः जंगल जाते थे और वहां से अच्छी किस्म की लकड़िया काट लाते थे, और उन्हें बाजार मे बेच कर कुछ पैसे कमा पाते थे |

 

इंग्वार जब कुछ बड़ा हुआ, तो वह भी अपने माता-पिता जी के साथ खेत मे कुछ ना कुछ काम करने लगा। इस तरह पूरा परिवार खूब मेहनत करता था ।

इसके बाद इंग्वार ज़ब 5 साल का हुआ, तो उनका दाखिला स्कूल मे करवा दिया गया ।. जिसमे इंग्वार को लेकर कुछ महीने बाद यह बात सामने आई कि इंग्वार डिस्लेक्सिया नाम की एक ऐसी बीमारी से पीड़ित हैं । यह एक ऐसी बीमारी है, जिसमें शब्दों को पढ़ने तथा समझने मे परेशानी आती हैं ।।

success-story-in-hindi


इधर पिता जी  इंग्वार के लेट उठने की आदत और डिस्लेक्सिया नाम की बीमारी से परेशान थे ।।

जिसको लेकर वह इंग्वार को अक्सर गुस्से मे बोल देते थे। कि तू इतना लेट सो कर उठता हैं, और वे पढ़ाई मे भी कमजोर हैं, ऐसा ही रहा तो तू जिंदगी मे कुछ नहीं कर सकता ।।

 

पिता जी की यह बात इंग्वार को बहुत चुभती थी । पिता की इस बात को गलत साबित कर दिखाना चाहता था, कि एक दिन वो जिंदगी मे जरूर कुछ बड़ा कर के दिखाउगा ।।

 

अपनी इस लेट उठने की आदत से अक्सर स्कूल लेट पहुँचता था, जिस वजह से मास्टर जी उसे खूब सुनाते थे ।।

मास्टर जी और पिता जी की डाट से इंग्वार ने एक दिन ठान लिया, कि अब मैं खुद की आदत को सुधार कर रहूँगा, और मुझे अपने साथ के बच्चो से ज़ादा पढ़ना होगा,  ताकि मे उन तक पहुँच सकूँ ।।

 

जिसके चलते इंग्वार ने सुबह 5:30 का अलार्म लगाया, और अलार्म को स्टॉप करने वाला बटन तोड़ दिया । अब अलार्म बजने से रोज इंग्वार 5:30 पर उठ जाता था ।।



एक दिन सेल ख़तम हो गया । सुबह अलार्म नहीं बजा फिर भी इंग्वार समय से पहले ही उठ गया । यह देख इंग्वार अचम्भा रह गया की यह कैसे हुआ, अलार्म भी नहीं बजा और मेरी आँख अपने आप खुल गई ।।



तो दोस्तो, अब रोज वह सुबह जल्दी उठने की आदत के चलते इंग्वार खूब मन लगा कर पढ़ाई करता था । ताकि वो इस डिस्लेक्सिया बीमारी को भी हरा दे ।।

 

सरकंडो की कलम बना कर बेची | Success story in hindi

6 वर्ष की उम्र से इंग्वार पढ़ाई भी करता था । और अपने पिता के साथ लकड़िया लाने जंगल में भी चला जाता था ।

हलाकि यह उसके खेलने कूदने की उम्र थी, लेकिन अपनी जिद के चलते उसे अब खेल कूद मे कोई रूचि नहीं रह गई थी ।। उसके मन मे बस अब एक ही धुन सवार थी , वो धुन थी कुछ बड़ा करने की ।।


Success Story

अब जब भी इंग्वार अपने पिता के साथ जाता था, तो वहां से लोटते  हुए रास्ते से लकड़ी के कुछ अच्छे सरकंडे चुन कर उठा लाता था । उन सरकंडो की कलम बना कर स्कूल के बच्चो को बेच कर खुद का जेब खर्च निकाल लेता था ।।

 


यहीं से इंग्वार अपनी इस छोटी सी उम्र से ही पैसा कमाने के और भी बेहतर अवसर तलाशने लगा था ।।

 

जब वो 7 साल का हुआ तो, अपने पिता जी द्वारा बनाई तीन पहियों वाली लकड़ी की साईकल पर माचिस बेचने जाने लगा । इससे वह अपने स्कूल के खर्चे निकाल लेता थ ।।

माचिस बेचने का कम शुरू किया | Success Story in hindi

 


10 साल की उम्र मे उसके पिता ने उसे साईकल दे दी । जिस पर वह अपने आस पास के गांव मे भी माचिस बेचने जाने लगा ।।



उसी दौरान उसे पता चला, कि अगर यह माचिस स्टॉकोम शहर के होलसेल से खरीद ली जाए, तो काफ़ी सस्ती पड़ेगी । तो इस तरह मैं अधिक माचिस लोगो को बेच पाउँगा । यानी अधिक मुनाफा कमाऊंगा ।।

वही स्टोकोम शहर मे अपने एक रिश्तेदार की मदद से इंग्वार ने बहुत सारी माचिस मंगवा ली ।।


अब वह इन माचिसों को पहले से भी कुछ कम दाम मे बेचने लगा । इस तरह इसमें भी इंग्वार को सब खर्चे निकालने के बाद पहले के मुकाबले काफ़ी पैसे बच जाते थे ।।

success story

लेकिन जब इंग्वार 12 साल का हुआ , तो अपनी इस आय से बड़ी कक्षा का खर्च निकालना मुश्किल हो गया ।

तब इंग्वार ने अपनी आय को और बढ़ाने के लिए कुछ डेकोरेशन वाले प्रोडक्ट भी खरीद कर बेचने शुरू कर दिये, और साथ ही साथ बाॅल पेन और पेन्सिल भी बेचने लगा ।।


बाॅल पेन बेचने से जब अच्छा मुनाफा हुआ, तो इंग्वार ने होलसेल से बहुत मात्रा मे बाॅल पेन खरीदना चाहा, लेकिन उसके पास इतने पैसे नहीं थे। कि वो खरीद सके ।



तब इंग्वार ने बैंक से 63$ डॉलर का लोन लें लिया और यह उसकी लाइफ का पहला और आखरी लोन था ।

उसने अपने सभी सामान को स्टॉक करने के लिए एक छोटी सी झोपड़ी बना ली ।।

साथ ही वो अपने पिता के साथ जंगल जाकर कंस्ट्रक्शन मे काम आने वाली लकड़ियां लाने मे भी मदद करता था। लेकिन इन सब कामों के बावजूद उसने पढ़ना नहीं छोड़ा ।.

  success story in hindi


लेकिन उन्होंने 20 साल तक आते--आते इंग्वार,लेकिन अब उन्होंने बिज़नेस को आगे बढ़ाना चाहा था । जिसके लिए उन्हे  अपने बिज़नेस के लिए अधिक समय देना अनिवार्य था । इसी के चलते इंग्वार ने अपनी पढ़ाई भी छोड़ दिया ।।.

 

अभी तक इंग्वार साईकल पर घूम--घूम कर माचिस और डेकोरेशन जैसे कई अन्य सामानो को बेचने से उसके पास काफ़ी अच्छी जानकारी इकठ्ठा हो गई थी ।।.


 

जिसमे उसने यह समझा की, उसके आस पास के इलाकों मे लकड़ी की बहुत सी चीजे बनाई जाती हैं और कौन सा सामान कहा से और कितना सस्ता मिलेगा इन सब बातो का ज्ञान इंग्वार को अच्छे से हो गया था.





टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

Rich Dad and Poor Dad Summary in Hindi